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Tuesday, 27 September 2011

आपकी आजादी

सीता सावित्री गांधारी
तुमने क्यों ढला ऐसा साँचा
जो कारागार बन गया है अब
क्यों लेना पड़ता है उन्हें
अज्ञात नाम का सहारा
जो लिखना चाहती हैं असली सच
क्यों नहीं है अभी भी सरल
अभिव्यक्त करने को स्वतंत्र विचार
क्यों नहीं आती है कोई लेखनी आगे
रचने को आपके अपने मूल्य
कहाँ है प्लेटफोर्म जहाँ मुक्त हैं आप कारा से
कहाँ ढूँढें हम आपकी स्वतंत्रता
समाज में
राजनीति में
या फिर सांस्कृतिक/आर्थिक/शैक्षिक गतिविधियों में
गाँव कसबे शहर
घर घेर स्कूल ससुराल बच्चे
बस यही है वह परिधि जिसके भीतर स्वतंत्र हैं आप
कितना आसान है शोर करना ऑफिस की आजादी का
पर क्या सचमुच इस आजादी की डोर
नहीं है हाथ महंगाई के
क्या घर/ऑफिस का कोई कमरा
है आपका अपना
यहाँ तक क़ि आपका अपना समय
वह भी नहीं है आपका
सचमुच भारतीय साहित्य का इतिहास आधा है
काश कोई अम्बेडकर
आपके यहाँ भी हो जाता/जाती पैदा.
- शून्य आकांक्षी